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दया करो गरीब की तरफ ध्यान दो। भूखा तीन दिन से कुछ भी नहीं खाया। रहने के लिए घर नहीं है भगवान की कसम। एक भिखारी बड़े धीरे से कुछ बोल रहा था। उसकी आवाज़ में एक अजीब सी शक्ति थी, जो राह चलते लोगों को रुकने पर मजबूर कर देती थी। उसके शब्दों में एक गहराई थी, जैसे वो जीवन के सबसे बड़े रहस्यों को छू रहे हों।दोस्थो शब्दों की ताकत बस इतनी नहीं है कि वे हमें कुछ बताते हैं, बल्कि यह भी है कि वे हमें कैसे महसूस कराते हैं। एक अच्छा शब्द हमारे दिन को रोशन कर सकता है, जबकि एक कठोर शब्द हमें तोड़ भी सकता है। इसलिए, आइए हम शब्दों के इस खेल को समझें और उन्हें सावधानी से चुनें, ताकि हम एक सकारात्मक प्रभाव डाल सकें और एक बेहतर दुनिया बना सकें दोस्थो यह कहानी रशियन राइटर एंटन शेकर की एक और स्टोरी द बैगर। एक भिखारी उस बड़ी कमाल की स्टोरी है। दोस्तों, एक बहुत बड़ा शहर, जहाँ की गलियों में जिंदगी अपनी पूरी रफ्तार से दौड़ रही थी। वहाँ, एक न्यायालय दफ्तर के पास,एक भिखारी बड़े धीरे से कुछ बोल रहा था। उसकी आवाज़ में एक अजीब सी शक्ति थी, जो राह चलते लोगों को रुकने पर मजबूर कर देती थी। उसके शब्दों में एक गहराई थी, जैसे वो जीवन के सबसे बड़े रहस्यों को छू रहे हों।दया करो गरीब की तरफ ध्यान दो। भूखा तीन दिन से कुछ भी नहीं खाया। रहने के लिए घर नहीं है भगवान की कसम। मैं एक स्कूल टीचर था आठ सालों के लिए। फिर लोग साजिश की वजह से। मेरे कलीग्स की साजिश की वजह से मैंने जॉब खो दी और अब एक साल से करने को कुछ नहीं है। दया करो, कुछ खाने को दे दो। एडवोकेट सर्गेई उसके फटे पुराने कपड़ों की तरफ देखता है, भिखारी की तरफ देखता है। हल्के पीले रंग का उसने ओवरकोट पहन रखा था। उसकी डल शराबी वाली आंखें। गालों पर लाल स्पॉट। उसे देखकर लग रहा था जैसे वह पहले भी कहीं देखा देखा है। वह भिखारी बोला, साहब, मुझे अलग से एक ऑफर आया एक पोजीशन के लिए, लेकिन मेरे पास पैसे नहीं है। वहां जाने के लिए मेरी मदद करो। मुझे मांगते हुए शर्म तो आ रही है, लेकिन क्या करूं, मेरे हालातों ने मुझे मजबूर कर रखा है। हालातों की वजह से यहां पर मैं भीख मांग रहा हूं। मुझे शौक नहीं है भीख मांगने का। उस एडवोकेट ने उसकी चूत की तरफ देखा, जूतों की तरफ देखा। एक शू तो ऊंचा था, एक नीचा था। तभी उसको याद आया कुछ








वह बोला भिखारी को ओये इधर देखना, इधर देखना। मैं तुझसे कल या परसों मिला हूं साडे स्ट्रीट में। तब तू मुझे बोल रहा था। तू एक स्टूडेंट है। कुछ याद आया? मेरे माथे पर कुछ लिखा हुआ है या मैं शकल से तुझे? नहीं नहीं, मैं वो नहीं हूं। वो एकदम पीछे जाता हुआ, लड़खड़ाता हुआ बोला। धीरे बोलने लगा जैसे झूठ साफ दिखता है। जब कोई बोलता है तो मैं तो सच में एक स्कूल टीचर साहब। चाहो तो मेरे पेपर देख लो चुपकर। एडवोकेट गुस्से में बोला। झूठ मत बोल, नहीं तो अभी पुलिस को बुलवा बोल बुलवाओ। अबके पुलिस की धमकी मिलने के बाद उसने सीने पर हाथ रखा आपने और बोला हां साहब, मैं झूठ बोल रहा था और उस दिन भी आपसे झूठ बोला था। मैं कोई स्कूल टीचर नहीं हूं, न कोई स्टूडेंट हूं। सब झूठ है। दरअसल मैं गाना गाता बजाता था, म्यूजीशियन हूं। शराब पीने की गंदी आदत की वजह से मेरे ग्रुप ने मुझे बाहर निकाल दिया। तो अब आप मुझे बताओ मैं क्या करूं?अब मैं किसी को बताऊंगा कि शराब की हैबिट की वजह से मेरी जॉब गई है तो कोई मुझे काम भी नहीं देगा। पैसा भी नहीं देगा तो मैं कुछ नहीं कर सकता। मुझे झूठ बोलना पड़ता है। अगर मैं सच बोलूंगा तो मुझे कोई कुछ नहीं देगा। आप बताओ मैं क्या करूं, क्या करूं? पूछ रहा है, क्या करूं? कामकर काम काम कर सकता है ना? हाथ पैरों में जंग तो नहीं लगी हुई काम। ये तो मैं भी जानता हूं साहब, लेकिन काम देगा कौन मुझे? मैं देता हूं। बोल करेगा क्या काम? लकड़ी काट लेगा मेरे लिए। सर, मैं मना तो नहीं करूंगा। लेकिन आप मुझे क्यों चुन रहे लकड़ी काटने के लिए? आज आप जानते हैं कि लकड़ी काटने वाले कितने सारे बेरोजगार बैठे हैं। अच्छे। मुझसे ज्यादा वुड कटर साहब को मिल सकते हैं। तू काटेगा या नहीं, ये बता। हां, मैं काट दूंगा। बहुत बढ़िया। चल मेरे साथ। और इतना कहकर वह एडवोकेट उसे अपने साथ घर में ले आया। घर में घुसते ही वह अपने हाथों को मसलता हुआ अपने कुक को किचन से बुलाता है। अलग अलग। यहां पर इन जेंटलमैन को ले जाओ, लकड़ी दिखाओ। इनको काटनी है तो वह कुक के पीछे पीछे चला गया। वह ले गई उसे। उसकी चाल को देखकर लग रहा था उसे यह काम करने में कोई इंट्रेस्ट नहीं है। भूखा था। काम की जरूरत थी, लेकिन इस टाइप का काम नहीं करना चाहता था। क्योंकि वैसे भूखा है। जान तो है नहीं करेगा क्या?बोलते बोलते कुछ ज्यादा बोल गया। अपने ही बोले वर्ड्स के जाल में फंस गया और यहां पर पहुंच गया। एक बात और थी। उसकी सारी ताकत उसकी शराब पी गई थी। बड़ा अनहेल्दी था तो करेगा क्या? उसे यह काम हो सकता था। न वह करना चाहता था। अब एडवोकेट अपने डाइनिंग रूम में पहुंच गया। वहां पर जाकर यह देख रहा था कि ओल्गा कैसे उसको लेकर जा रही थी। अब यह ओल्गा ने उसको घूरा। बड़े गुस्से से थोड़ा धक्का देकर दरवाजा झटके से बंद कर दिया। अब वह भिखारी जाकर एक लॉक पर बैठ गया। लकड़ी के कुंदे पर बैठ गया और कुछ सोचने लगा। अपने गालों को अपने हाथों के बीच में रखकर तो ओल्गा उसकी तरफ एक कुल्हाड़ी फेंकती है और उसे गाली देने लगती है कि करो काम।














 अब बेकारी ने बेमन से एक मोटी सी लकड़ी उठाई और अपने पैरों के बीच में फंसाकर उसको धीरे से मारा। कुल्हाड़ी से ऐसा करने से बार बार क्या होता था? बार बार वह लकड़ी का टुकड़ा गिर जाता था साइड में। फिर वह उसे उठाता, वापस मारने लगता। वह वापस गिर जाता तो उसको डर लग रहा था। कहीं गलती से उसको कुल्हाड़ी चलानी तो आती नहीं है। उसकी उंगलियों पर या जूते पर लग न जाए। कुल्हाड़ी बीच बीच में अपने कांपते हाथों पर फूंक मारता था। अब एडवोकेट को गुस्सा था इस भिखारी पर। उसे देखते हुए गायब हो गया। उसे थोड़ा बुरा लग रहा था कि कहां एक बीमार शराबी आदमी को मैंने इतनी ठंड में इतना मुश्किल काम पर लगा दिया। लेकिन करीब आधे घंटे के बाद ओल्गा वहां पर आई और बोली कीसारी लकड़ी कट चुकी है। मतलब कि उसने सारी लकड़ी काट दी है। बड़ी अजीब बात थी। अभी तो एक लकड़ी नहीं कट रही थी। अभी सारी लकड़ी काट दी। ठीक है बहुत अच्छे। एक काम करो, उसे आधा रुबल दे दो और बोलो कि अगर वह चाहे तो हमेशा लकड़ी काटने के लिए हर महीने की पहली तारीख को आ सकता है। उसको हमेशा यहां कोई न कोई काम मिल जाएगा। छोटा मोटा। अब हर महीने के पहले दिन वह आता, आधा रूबल कमा लेता। हालांकि मुश्किल से वह अपने पैरों पर खड़ा हो पाता, लेकिन जब भी आता, कोई न कोई काम उसको मिल जाता। जैसे कि बर्फ को हटाओ, कभी कुछ करो, कभी कुछ करो। ऐसा कोई भी काम करता तो उसे दोसो रुपये से चारसो रुपैये मिल जाते। एक बार तो इसको एडवोकेट के ओल्ड ट्राउजर्स में मिल गए। अब एक दिन एडवोकेट को अपना घर शिफ्ट करना था तो इसकी मदद ली। पैकेजिंग करने में, फर्नीचर सैट करने में, फर्नीचर ट्रांसपोर्ट करने में। उस दिन इसने शराब भी नहीं पी थी। यह बड़ा साइलेंट था, सैड था। लेकिन बाकी के जो सामान शिफ्ट करने वाले थे, इस पर हंस रहे थे, मजाक बना रहे थे। इसकी अपीयरेंस को देखकर इसके फटे पुराने कपड़े थे। उनको देखकर और कुछ काम ढंग से नहीं कर पा रहा था। उसको देखकर सामान शिफ्ट होने की बाद में इसको एडवोकेट ने अपने पास बुलवाया और बोला कि मुझे खुशी है। मेरे बोले हुए वर्ड्स तुम पर इतना असर कर गए और उसे एक रूबल देते हुए बोला क्या तुमने नशा भी नहीं किया गुड!वैसे तुम्हारा नाम क्या है? तो मेरा लश्कर। देखो लश्कर, अब तुम्हारी हालत सुधर रही है तो मुझे एक अच्छा काम तुम्हें दिलवाना पड़ेगा। ठीक ठाक काम जो पढ़े लिखे लोग करते हैं, मेहनत मजदूरी वाला नहीं। तो बताओ लिखना आता तुमको तो बोला हां सब आता है। ठीक है तो यह मेरा लैटर लो। मेरा एक फ्रेंड है। मैं तुमको जगह बता देता हूं। उस जगह पर जाकर उसको दे देना। वह तुम्हें कॉपी करने की जॉब दे देगा। मेहनत से काम करना। शराब मत पीना। मैंने जो तुमको समझाया उसे याद रखना। वह बड़ा खुश था कि उसके कहे हुए वर्ड्स से एक आदमी की जिंदगी बन गई। एक आदमी को सही रास्ता दिखाकर उसकी शराब की लत छुड़वाकर अच्छा काम दिलवाया। उससे हाथ मिलाया और उसको भेज दिया।








 गुडबाय बोल कर वह लेटर लेकर चला गया और उसके बाद कभी भी यार्ड में काम करने नहीं आया। दोबारा कभी नहीं दिखा। अब इसके बाद वह एक। काम कर रहा था। इस बात को दो साल गुजर गए। एक शाम एडवोकेट एक थियेटर में मूवी देखने गया। टिकिट विंडो के पास में टिकिट खरीद रहा था। वहीं पर इसके साथ में एक छोटा सा आदमी कोट पहनकर खड़ा था।सेल्स किनकी टोपी थी उसकी?वह टिकिट बेचने वाले से गैलरी की टिकिट मांग रहा था। पैसे उसने कॉपर के कॉइन्स दिए। उसे। अरे लश को इस दैट यू वॉटर सरप्राइज कैसे हो? क्या कर रहे हो? कैसा चल रहा? सब कुछ बोला सब सही है। मैं नोटरी बन गया हूं। लीगल डॉक्यूमेंट का जो काम करते हैं, हर महीने थर्टी फाइव रूबल कमा लेता हूं। वाह! बहुत अच्छे। गॉड ब्लेस यू। मुझे बड़ी खुशी हुई। लश्कर थर्टी फाइव रूबल्स कमा लेते हैं। मेरे लिए तो मैं गॉड सन की तरह हूं। मेरी बात सुनकर, मेरी डांट सुनकर उसी सबका असर है कि आज तुम एक अच्छी जिंदगी जी रहे हैं। क्या तुम्हें याद है एक दिन ऐसा भी था, जिस दिन तुम मेरे पैरों में पड़े भीख मांग रहे थे। थैंक यू। मेरी बातों को सही तरह से लेने के लिए आज तुम्हारी जिंदगी बन गई। देखा आपको भी थैंक्यू सर। जब से मैं आपके घर आया तबसे बदला हूं। यह बात गलत नहीं है। नहीं तो आज भी किसी ना किसी को टीचर या स्टूडेंट बोलकर भीख मांग रहा होता। सड़क पर कहीं पर आपके घर आकर मैंने शराब पीना छोड़ी, भीख मांगना छोड़ा। आपके इन काइंड वर्ड्स का बहुत शुक्रिया सर। मुझे एक अच्छी सलाह देने के लिए बहुत शुक्रिया। लेकिन एक चीज मैं आपको बताना चाहता हूं आपकी जो कुक हैना। ओल्गा बहुत ही अच्छी वुमन है। सर, सच यह है कि ओल्गा ने मेरी जिंदगी में चेंज करने में बहुत बड़ा रोल प्ले किया है। मेरी जिंदगी बचाने में उसने पूछा कैसे? जब मैं आपके घर आता था लकड़ी काटने के लिए तो वह मुझे बोलती थी कि तुम बिल्कुल बेकार हो। तुम्हारा फ्यूचर खराब है। जब उसने मेरी हालत देखी ना, बहुत सैंड हो गई। मैंने उसको मेरे लिए रोते हुए भी देखा। सर उसमें मेरे लिए संपति थी। मैंने देखी है। वह हर वक्त मुझे कुछ ना कुछ बोलती रहती थी। मेरे लिए वह तकलीफ उठाकर वह लकडियां काटती थी और मुझे तो ऐसे ही पैसे मिल जाते थे। ये सब बातें मुझे फील होने लगी। आप सोचो मुझे इंसान को ऐसी बातें फील होने लगी। इन्हीं सब चीजों की वजह से मुझे लगा कि नहीं अब मुझे खुद को बदलना है। आपको बता आज तक मैंने आपके घर आकर कभी भी एक लकड़ी भी नहीं काटी। सब वो करती थी। पता नहीं उसके इस बिहेवियर का और किन बातों का मुझ पर क्या असर हुआ। मैं बदल गया। बिल्कुल बदल गया। मैं अलगाव कभी भूल नहीं सकता। उसका बहुत एहसान है मुझपर। इतने में अंदर से बेल बजने की आवाज आई। टाइम हो गया था फिल्म का। एडवोकेट को भी रियलाइज हुआ कि ओल्गा ने मेरी तरह कभी इसे थैंक्यू की उम्मीद नहीं रखी। बस इसकी मदद की। दोस्तों, तो देखा आपने कि शब्दों में कितनी ताकत होती है। उम्मीद है इस वीडियो से आपने बहुत कुछ सीखा होगा। तब तक के लिए आपका बहुत बहुत आभार।

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